बड़ा सवाल,किसने किए पुणे में धमाके 

पुणे।
 महाराष्ट्र के पुणे में एक के बाद एक चार बम धमाकों की गुत्थी अभी तक नहीं सुलझ पाई है। धमाके किसने किए इस बारे में कोई सुराग नहीं चल पाया है। जहां केन्द्र सरकार धमाकों को आतंकी साजिश मानने से इनकार नहीं कर रही है वहीं महाराष्ट्र सरकार का कहना है कि अभी कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी। उधर पुणे पुलिस ने इस आतंकी साजिश मानने से साफ इनकार कर दिया है। गृह सचिव आरके सिंह ने कहा कि धमाके सोची समझी साजिश का नतीजा है। उन्होंने कहा सभी धमाके 45 मिनट के भीतर पांच किलोमीटर की परिधि में किए गए,जो यह दिखाता है कि यह किसी सोची समझी साजिश का हिस्सा है। अगर धमाकों की योजना बनाई गई थी तो इसके पीछे कोई गिरोह भी हो सकता हैं। हम जांच कर रहे हैं और अभी जांच शुरूआती दौर में है। जांच एजेंसियों को दो आईईडी मिले हैं, जो फट नहीं सके। हम आपको धमाकों से जुड़ी बहुत ज्यादा जानकारी नहीं दे सकते हैं। 
वहीं महाराष्ट्र के गृह मंत्री आर आर पाटिल का कहना है कि अभी कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी। पुणे के पुलिस कमिश्नर गुलाब राव पॉल ने भी धमाकों में किसी आतंकी संगठन का हाथ होने से इनकार किया है। उन्होंने कहा कि कम तीव्रता के धमाकों को देखते हुए यह स्थानीय बदमाशों की साजिश हो सकती है। जिन्होंने भय का माहौल बनाने के लिए धमाके किए होंगे। 
ये लोग कुछ अन्य समूहों से जुड़े हैं जो आतंकी गतिविधियों में लिप्ट नहीं हैं। जब उनसे धमाकों की वजह पूछी गई तो उन्होंने कहा कि लोगों में भय पैदा करना धमाकों का मकसद हो सकता है। पुणे के पुलिस कमिश्नर की यह थ्योरी गले नहीं उतर रही है क्योंकि निष्क्रिय किए गए बम में अमोनियम नाइट्रेट के उपयोग की बात सामने आई है। इससे लगता है कि इसमें आतंकी संगठन का हाथ हो सकता है। कुछ पूर्व सुरक्षा अधिकारियों का मानना है कि धमाकों में नक्सलियों का भी हाथ हो सकता है। 
इस बीच धमाके में घायल शख्स की पहचान दयानंद पाटिल के रूप में हुई है। वह जंगली महाराज इलाके में टेलर का काम करता है। पाटिल की पत्नी से पूछताछ की जा रही है। सूत्रों के मुताबिक धमाकों में जिस तरह की सामग्री उपयोग की गई थी उससे लगता है कि यह सोची समझी साजिश है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने धमाकों के लिए टाइमर का उपयोग किए जाने के संकेत दिए हैं।

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