डिम्पल निर्विरोध निर्वाचित, रचा इतिहास 
कन्नौज।
उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की पत्नी डिम्पल यादव ने कन्नौज लोकसभा सीट के उपचुनाव में शनिवार को निर्विरोध निर्वाचित होकर इतिहास रच दिया। अविभाजित उत्तरप्रदेश की वे तीसरी ऎसी प्रत्याशी हैं जो निर्विरोध निर्वाचित घोषित की गई हैं। वैसे वे देश की पहली महिला प्रत्याशी हैं जिन्हें यह गौरव प्राप्त हुआ है। जिलाधिकारी, सह जिला निर्वाचन अधिकारी सेल्वा कुमार ने शनिवार को डिम्पल यादव के निर्विरोध निर्वाचन की घोषणा की।
औपचारिक घोषणा बाकी थी -
कन्नौज लोकसभा सीट से दोनों निर्दलीय उम्मीदवारों दशरथ शंखवार और अजय कटियार के शुक्रवार को नामांकन वापस लेने के साथ ही सपा प्रत्याशी डिम्पल यादव के निर्विरोध निर्वाचित होने का रास्ता साफ हो गया था। शनिवार को इसकी औपचारिक घोषणा होनी थी। अपराह्न तीन बजे नाम वापसी की तारीख का समय खत्म होते ही उनके निर्वाचित होने की घोषणा कर दी गई। 
कौन- कौन हुए निर्विरोध निर्वाचित -
इससे पहले इलाहाबाद दक्षिण सीट से 1952 में कांग्रेस नेता पुरूषोतम दास टंडन निर्विरोध निर्वाचित हुए थे। लोकसभा के लिए 1962 में हुए चुनाव में टिहरी गढ़वाल सीट से राजा मानवेन्द्र शाह निर्विरोध जीते थे। टिहरी गढ़वाल अब उत्तराखंड में है। टंडन और शाह कांग्रेस के प्रत्याशी थे जबकि डिम्पल सपा प्रत्याशी हैं। 
उपचुनावों में इससे पूर्व 1952 में इलाहाबाद दक्षिण सीट से पुरूषोत्तम दास टंडन के अलावा ओडिशा के कटक से कांग्रेस के बी राय सौराष्ट्र के जालावाड से कांग्रेस के जे एन पारिख सन 1956 में आन्ध्रप्रदेश के विशाखापत्तनम से कांग्रेस के एम के वी आनंद, अहमदाबाद से कांग्रेस के एम एस गणेश, पश्चिम बंगाल के बसीरत से पी एन कायल निर्विरोध निर्वाचित घोषित हुए थे। महाराष्ट्र के नासिक से कांग्रेस के यशवंत राव चह्वाण और विशाखापत्तनम से एमकेवी आनंद एक बार फिर उपचुनाव में 1960 में निर्विरोध निर्वाचित हुए। सिक्किम से सिक्किम सोशलिस्ट पार्टी के डी के भंडारी 1985 के उपचुनाव में निर्वाचित घोषित हुए थे। 
कांग्रस, बसपा ने नहीं खड़े किए उम्मीदवार - 
डिंपल के खिलाफ प्रमुख प्रतिद्वंदी बहुजन समाज पार्टी, कांग्रेस और भाजपा के उम्मीदवार नहीं होने की वजह से ही उनके निर्विरोध निर्वाचन की अटकलें लगनी शुरू हो गई थीं। कांग्रेस और बसपा ने उम्मीदवार नहीं खड़े किए जाने की घोषणा पहले ही कर दी थी लेकिन भाजपा ने उम्मीदवार नहीं खड़े करने का एलान करने के बाद नामांकन के अंतिम दिन छह जून को दोपहर में अचानक जगदेव सिंह यादव को अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया था। 
नामांकन अवधि तीन बजे बाद जिला निर्वाचन अधिकारी के पास नहीं पहुंचने के कारण भाजपा उम्मीदवार का पर्चा दाखिल नहीं हो सका और पार्टी को खासी किरकिरी झेलनी पड़ी। अब डिंपल ने निर्विरोध निर्वाचन की एक बड़ी बाधा पार कर ली थी। इससे भाजपा की हुई किरकिरी के मद्देनजर उसके नेताओं ने सपा पर आरोप लगाना शुरू कर दिया कि उसके उम्मीदवार को पर्चा दाखिल करने से रोका गया। भाजपा ने अपने उम्मीदवार को दो स्थानों पर रोकने का सपा पर आरोप लगाया था।
कांग्रेस ने अखिलेश के खिलाफ भी नहीं उतारा था उम्मीदवार - 
कन्नौज बसपा ने छह महीने तक उपचुनाव नहीं लडने की घोषणा के तहत डिंपल यादव के खिलाफ उम्मीदवार नहीं उतारा जबकि कांग्रेस ने पहले ही कह दिया था कि कन्नौज लोकसभा सीट पर हो रहे उपचुनाव में उम्मीदवार नहीं उतारा जाएगा। कांग्रेस ने 2009 के हुए लोकसभा चुनाव में भी कन्नौज सीट पर अखिलेश यादव के खिलाफ प्रत्याशी नहीं उतारा था।
राजबब्बर ने हराया था डिंपल को -
डिंपल वर्ष 2009 में फिरोजाबाद लोकसभा सीट के उपचुनाव में कांग्रेस के राजबब्बर से एक लाख मतों से पराजित हो गई थीं। फिरोजाबाद सीट उनके पति अखिलेश यादव के इस्तीफे से रिक्त हुई थी। फिरोजाबाद सीट के उपचुनाव में मिली हार के बाद अखिलेश ने कहा था कि उनकी पत्नी अब कभी चुनाव नहीं लड़ेंगी लेकिन विधानसभा चुनाव के बाद राज्य में पार्टी की पूर्ण बहुमत की सरकार बनने के बाद स्थिति बदली और कन्नौज के सपा नेताओं और कार्यकर्ताओं के आग्रह पर पार्टी अध्यक्ष ने अपनी बहू को उपचुनाव में प्रत्याशी घोषित किया। 
यादव ने फिरोजाबाद के साथ ही कन्नौज से भी चुनाव लड़ा था। मुख्यमंत्री बनने के बाद अखिलेश यादव ने कन्नौज लोकसभा सीट से इस्तीफा दे दिया था।

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