पर्यटन, लोक संस्कृति और विज्ञापन जगत की अनूठी हस्ती का महाप्रयाण

जैसलमेर 

पश्चिमी राजस्थान के सरहदी जैसलमेर जिले के लोक संस्कृतिकर्मी और कलाकार लक्ष्मीनारायण बिस्सा आकर्षक व्यक्तित्व और जादुई कलाकार थे जिन्होंने अन्तर्राष्ट्रीय मरु महोत्सव को ऊँचाइयां देते हुए लाखों देशी-विदेशी सैलानियों में अपने अनूठे और रौबीले व्यक्तित्व की छाप छोड़ी और कई वर्षों तक मरुश्री के रूप में महोत्सव में छाए रहने के बाद स्थायी मरुश्री और मिस्टर डेजर्ट इमेरिटस का गौरव पाया। 

स्थायी मरुश्री लक्ष्मीनारायण बिस्सा लोक संस्कृति जगत की वह हस्ती थे जिन्होंने अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध जैसलमेर के मरु महोत्सव के अन्तर्गत सन् 1988 में शुरू हुई पहली मरुश्री (मिस्टर डेजर्ट) की सर्वाधिक आकर्षक एवं प्रतिष्ठापूर्ण प्रतियोगिता में हिस्सा लिया और पहले मरुश्री का खिताब पाया। 

सरल, सहज और माधुर्यपूर्ण स्वभाव युक्त एलएन बिस्सा उन बिरले लोगों में से थे जो जीवन में हर क्षण सकारात्मक चिन्तन के साथ सामाजिक समरसता और रचनात्मक माहौल के सृजन को ही अपना ध्येय समझते थे। जैसलमेर की सरजमीं पर 3 अगस्त 1958 को वासुदेव बिस्सा के घर मगी देवी की कोख से जन्म लेने वाले लक्ष्मीनारायण बचपन से ही मौलिक हुनर के धनी थे और सांस्कृतिक अभिरुचियां शैशव से ही आकार पाने लगी थी। 
निराली छवि ने दी शौहरत 
मशहूर आकर्षक एवं रौबीले व्यक्तित्व के धनी लक्ष्मीनारायण बिस्सा ऊँची कद-काठी, नीली आँखें, घुंघराले बाल, दो पाटों में विभक्त दाढ़ी और ताव दी हुई ओज जगाती मूँछों की वजह से अपनी निराली छवि रखने वाले कलाकार थे। उनके इसी ओजस्वी व्यक्तित्व की बदौलत सन् 1988 से लेेकर सन् 1991 तक होते रहे मरु महोत्सव में वे हमेशा प्रतिस्पर्धा में अव्वल रहे और इतने वर्षों तक मरु श्री का सेहरा उनके माथे बंधता रहा। 
मरुश्री स्पर्धा के निर्णायक 
इसके बाद सन् 1992 में लक्ष्मीनारायण बिस्सा को मिस्टर डेजर्ट इमेरिटस की उपाधि से सम्मानित करते हुए मरु महोत्सव की मरुश्री प्रतियोगिता के निर्णायक मण्डल का आजीवन सदस्य बनाया, तभी से बिस्सा की मरु महोत्सव में निरन्तर सहभागिता बनी रही। 
विज्ञापन जगत में भी सिरमोर 
कला और संस्कृति जगत की समर्पित सेवाओें में सदैव अग्रणी रहे स्थायी मरुश्री लक्ष्मीनारायण बिस्सा के आकर्षक व्यक्तित्व का जादू विज्ञापन जगत में भी छाया रहा। सन् 1996 में क्रिकेट वल्र्ड कप के दौरान कोका कोला इन्टरनेशनल के विज्ञापन में जनाकर्षण का केन्द्र रहे बिस्सा ने जैसलमेर सिगरेट के लिए भी विज्ञापन के जरिये लोकप्रिय छवि बनायी। विज्ञापन गुरु पीयूष पाण्डे द्वारा निर्देशित एशियन पेन्ट्स के विज्ञापन में भी वे छाये रहे। स्पा्ट फिल्म सेंट लंदन द्वारा सन् 1997 में निर्मित मास्टर कार्ड इन्टरनेशनल में एलएन बिस्सा ने अपनी रौबीली छवि का तिलस्म दिखाया। 
बेमिसाल अभिनय का जादू बिखेरा 
जादुई कलाकार लक्ष्मीनारायण बिस्सा उन हुनरमन्द कलाकारों में थे जिन्होंने अपनी मौलिक प्रतिभा का हुनर उण्डेलते हुए अपने अभिनय और साँस्कृतिक प्रस्तुतियों को बेमिसाल बनाया। कई डॉक्यूमेंट्रीस, विज्ञापनों और फिल्मों में अपने विलक्षण हुनर की छाप छोड़ने वाले प्रसिद्ध कलाकार एल.एन. बिस्सा ने कोका कोला इण्डिया में ऋतिक रोशन के साथ काम करते हुए जैसलमेर जिले के प्रसिद्ध सम के रेतीले मखमली धोरों पर अपनी कला के इन्द्रधनुषी रंगों का दिग्दर्शन कराया। इसी प्रकार फिल्म ‘हरिओम’ में उन्होंने महाराजा का किरदार इतना कलात्मक ढंग से निभाया कि दर्शकों के हृदयपटल पर छा ही गए। 

सर्वस्पर्शी रचनात्मक कार्यकत्र्ता 
जैसलमेर की शान, मूलतः पर्यटन व्यवसाय से जुड़े रहे लक्ष्मीनारायण बिस्सा सामाजिक कार्यकत्र्ता और रचनात्मक समाजसेवी के रूप में जैसलमेर जिले की विभिन्न संस्थाओं से जुड़े थे। इनमें स्पीक मैके, नाद स्वरम्, जैसलमेर विकास समिति, इंटेक आदि प्रमुख हैं। 
जैसलमेर पर्यटन को दिया सम्बल 
जैसलमेर के हृदयस्थल गोपा चौक में सहारा ट्रेवल्स का संचालन करने वाले लक्ष्मीनारायण बिस्सा क्षेत्र के प्रमुख पर्यटन उद्यमी थे जिन्होंने जैसलमेर जिले में पर्यटन विकास को नई गति देने में अपना अमूल्य योगदान दिया। बिस्सा को कलाकार के रूप में नई भूमिका में आगे लाने में भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी ललित के. पंवार की खास भूमिका थी। जैसलमेर आने वाले पर्यटकों के लिए बिस्सा वो अजीब आकर्षण का केन्द्र थे जिनके साथ फोटो खिंचवाने को देशी-देशी सैलानी सदैव उत्सुक रहा करते थे। गोपा चौक में उनके प्रतिष्ठान सहारा ट्रैवल्स से होकर गुजरने वाले सैलानी उनकी मनोहारी छवि पाकर कुछ देर के लिए अभिभूत रह जाते थे। इन सैलानियों की उनके साथ फोटो खिंचवाने की तमन्ना पूरी करने में लक्ष्मीनाराण बिस्सा कभी पीछे नहीं रहते। 
रम्मत के उत्कृष्ट खिलाड़ी 
लक्ष्मीनारायण बिस्सा ने अभिनय, नृत्य और संवाद की त्रिवेणी के रूप में प्रसिद्ध परम्परागत रम्मत के क्षेत्र में भी खूब शौहरत हासिल की। उन्होंने रम्मत के विभिन्न किरदारों का जीवंत अभिनय प्रस्तुत कर जबर्दस्त छाप छोड़ी। 
भजनोें और गीतों का हमसफर 
बिस्सा उम्दा संगीतज्ञ और लोक कलाकार होने के साथ ही सांस्कृतिक जगत की सेवाओं में सदैव अग्रणी रहे। उनकी भजन गायकी और लोकवाद्यों का वादन ही ऎसा था कि हर कोई मंत्रमुग्ध हुए बगैर नहीं रह सकता था। जैसलमेर जिले में राष्ट्रीय पर्व-उत्सवों और विशिष्ट अवसरों पर आयोजित सांस्कृतिक समारोहों और विभिन्न कार्यक्रमों में उनकी भागीदारी ही आशातीत सफलता का मापदण्ड हुआ करती थी। 
दूर-दूर तक मशहूर रहे बिस्सा 
पश्चिमी राजस्थान ही नहीं बल्कि देश भर में खूबसूरत व्यक्तित्व की अमिट पहचान कायम करने वाले लक्ष्मीनारायण बिस्सा और मरु महोत्सव एक-दूसरे के पर्याय हो चले थे। यही वजह थी कि मरु महोत्सव के विज्ञापनों में वे दशकों तक विज्ञापनों, बैनरों, पोस्टरों और वैब साईटों पर छाए रहे। प्रदेश और देश के साथ ही उनके व्यक्तित्व की अभिराम छवि सात समन्दर पार भी छायी रही। 
जैसलमेर और दूसरी सभी जगह होने वाले आयोजनों में बिस्सा जनाकर्षण का केन्द्र रहा करते थे। जैसलमेर के रंगकर्मी और साहित्यकार विजय बल्लाणी इन आयोजनों में बिस्सा की तारीफ में इसीलिये इन शब्द चित्रों से उनकी प्रशस्ति किया करते थे - ‘‘कहानी है न किस्सा, इस सांस्कृतिक आयोजन का अहम् हिस्सा, हरदिल अज़ीज़ लक्ष्मीनारायण बिस्सा।’’ 
कला-संस्कृति जगत में शोक की लहर 
पश्चिमी राजस्थान के इस महान कलाकार के निधन से रिक्त हुए स्थान की पूत्रि्त होना संभव नहीं है। एक व्यक्ति का कई-कई किरदारों में जीवंत अभिनय और हुनर का कमाल लक्ष्मीनारायण बिस्सा जैसे बिरले कलाकार ही दिखा सकते हैं। ऎसे महान कलाकार के महाप्रयाण पर जैसलमेरवासी और प्रदेश के कला-संस्कृति जगत में शोक की लहर व्याप्त है।

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