'पानी मांगे 60 हजार करोड़' 
उदयपुर। 
state newsमुख्य सचिव सीके मैथ्यू ने कहा है कि राजस्थान में शुद्ध पेयजल की व्यवस्था के लिए 60 हजार करोड़ रूपए की जरूरत है। राज्य सरकार ने यह प्लान बनाकर योजना आयोग को भेजा है और मुख्यमंत्री इसकी स्वीकृति के लिए जुटे हैं। उदयपुर संभागीय प्रशासन की समीक्षा बैठक के बाद शनिवार को संवाददाताओं से उन्होंने कहा कि प्रदेश भर की 250 में से 175 पंचायत समितियों में भू-जल स्तर गिरा है। सरकार इसके लिए चिंतित है। पश्चिमी राजस्थान में विशेषकर इसमें गिरावट आई है।चालू वित्तीय वर्ष में पेयजल के लिए तीन हजार करोड़ रूपए का बजट रखा है। उन्होंने माना कि राज्य में पानी-बिजली का संकट चल रहा है। गर्मियों में बिजली खरीद के लिए सरकार ने सभी डिस्कॉम को 200 करोड़ रूपए अतिरिक्त दिए हैं। उन्होंने नि:शुल्क दवा योजना में मिल रहे फीडबैक पर कहा कि इसका सभी जगह अच्छा लाभ मिल रहा है। अपने मेल आईडी पर मांगे सुझावों के बारे में उन्होंने बताया कि उनको 50 प्रकार की शिकायतें और सुझाव मिले हैं, जिनके स्वयं जवाब देंगे। गुड गवर्नेस पर कहा कि सरकारी कार्यालयों में कार्मिकों की उपस्थिति जांचने के लिए प्रदेश में 1000 टीमों से निरीक्षण करवाए, जिनमें पहली बार 25 प्रतिशत अनुपस्थिति मिली। हाल ही कराए निरीक्षणों में यह घटकर 11 प्रतिशत रह गई।
रिक्त पदों से जूझ रहा उदयपुर
उन्होंने बताया कि उदयपुर संभाग में रिक्त पदों की बड़ी समस्या है। यहां विभागों में ठहराव नहीं है। इनको भरने के लिए विशेष प्रयास किए जाएंगे। अकेले जनजाति हास्टलों में 59 प्रतिशत पद रिक्त हैं।
आरएसएमएम अब सहकारिता पर
जनजाति उप योजना क्षेत्र के जिलों में राजस्थान स्टेट मिनरल्स एण्ड माइंस लि. की भागीदारी में किसी कम्पनी के नहीं आने मैथ्यू ने कहा कि इसके लिए सहकारी सोसायटियां बनाकर खनन का काम कराने का सरकार मानस बना रही है। इसी तरह सामान्य दिनों में भी अवैध खनन के खिलाफ अभियान चलाने की कार्य योजना बनाने की तैयारी है।

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