पशुधन सहायक की नई पौध होगी तैयार
हफ्ते की बात न्यूज, बाड़मेर
पिश्चमी राजस्थान का बाड़मेर कल तक उन जिलों में शुमार था जहां अभावों े अलावा कुछ नजर नही आता था लेकिन बाड़मेर े भू-गर्भ से निकलें अथाह तेल और कोयले े भण्डार ने बाड़मेर को काले पानी की सजा से बदलकर काले सोने की जमीन बना दिया है। तेजी से बदलते बाड़मेर के परिवेश में जहां बाड़मेर के आम आदमी की सोच सकारात्मक और नव शैक्षिणक हो चली हैं वही विकास के आधारों के साथ साथ बाड़मेर में शिक्षा के नये आधार भी सुलभ होने लगे है। रेतीले बाड़मेर में आज से चंद बरस पहले जहा कला, विज्ञान और वाणिज्य संकाय के लिए महज एक कॉलेज था लेकिन अब आलम यह हैं कि यहा दो दर्जन से अधिक अलग अलग संकायों के कॉलेज खुल चुके है। इतना ही नही जिले में पहली मर्तबा पशुपालन विद्यालय और इण्डियन नर्सिग काउसिल नई दिल्ली द्वारा जनरल नर्सिग की भी मान्यता मिल चुकी है। इस दोनो नये आधारों से अब बाड़मेर के हजारों विद्यार्थीयों की उम्मीदों को अब नये पंख लग गये है। एक जमाना हुआ करता था जब आम आदमी अपनी बिमारी े ईलाज े लिए सैकड़ो किलोमीटर का सफर तय करता था। तेजी से बदले परिवेश और तकनीक े चलते जहां इंसानो े लिए बेहतर चिकित्सा व्यवस्था हुई है वही अब सहरा े दमसाज जानवरो की सेहत की हिफाजत े लिए नई पौध तैयार होने जा रही है। कभी वेटेनरी शब्द से अन्जान रहने वाला बाड़मेर जल्द ही हर वर्ष 50 लोगो की पशुधन सहायक का तमगा देता नजर आएगा और इसका श्रेय बलदेव नगर स्थित ेम्ब्रिज नर्सिग इंस्टीट्यूट ऑफ वेटरनरी सांइस हो जाएगा। एक तरफ सरकार ने आदेश जारी कर ेम्ब्रिज नर्सिग इंस्टीट्यूट को अपनी मान्यता की मुहर दी है वही दुसरी तरफ इस मान्यता े बाद बाड़मेर राज्य े उन 6 जिलो में शामिल हो गया है। जहा पशुधन सहायक का पाठ्यक्रम शुरू किया है। इस पाठ्यक्रम े बाद जहां हजारो विद्यार्थियो का ना ेवल भविष्य संवरेगा बल्कि उनकी सरकारी नौकरी की उम्मीदो को भी पंख लगेगा।बाड़मेंर में तेल गैस के उत्पादन के साथ आये तेजी सें बदलाव की बयार में शिक्षा कें भी नव किर्तीमान खड़े हो रहे है। जिनमें विभिन्न नव विषयों को एक आधार के रूप में देखा जा रहा है। वहीं आदित्य शिक्षण एंव प्रशिक्षण संस्थान द्वारा संचालित केंम्ब्रीज नर्सिग इस्टीट्यूट ऑ वेटनरी साइंस को राज्य सरकार द्वारा मान्यता मिल जाने से बाडमेर में एक नई रोशनी की किरण जगी है। अब बाहर नही -
बाड़मेर े लिए कुदरत ने जहां काले अक्षरों से काल लिखा है वही दूसरी तरफ इस इलो में शैक्षणिक स्थिति भी कुछ खास अच्छी नही रही है। हालांकि बीते कुछ वषोर में बाड़मेर े शैक्षणिक माहौल में बड़ा बदलाव आया है और यही वजह है कि यहां े हुनर ने बड़ी-बड़ी परीक्षाओं में भी अपने हुनर का डंका बजाया है। बाड़मेर व जैसलमेंर के सीमान्त जिलो के छात्रों को अब पशुधन सहायक कोर्स करने के लिए अन्य जिलों में चक्कर नही काटना पड़ेगा। अब बाड़मेंर में ही आसानी सें यह कोर्स हो जायेगा।
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