काम नहीं तो विधायकों की शिकायत जायज-बैरवा
जयपुर।
सरकार के एक केबिनेट मंत्री ने सरकार से असंतुष्ट चल रहे विधायकों की शिकायतों को जायज माना है। सामाजिक न्याय और अघिकारिता मंत्री अशोक बैरवा का मानना है कि कार्यकर्ताओं के काम नहीं होते तो विधायकों की शिकायतें जायज हैं। विधायकों में नाराजगी तो है और इससे अच्छा संदेश नहीं जाता। मंगलवार को अपने घर पर मिलने आए कांग्रेस के आधा दर्जन असंतुष्ट विधायकों से मुलाकात के बाद मंत्री बैरवा ने मीडिया के सामने यह बयान दिया। उन्होंने माना कि 27-28 विधायक आलाकमान से भी इस संबंध में शिकायत कर चुके हैं। बैरवा ने कहा कि वे मुख्यमंत्री से इन विधायकों की बात रखने के लिए समय मागेंगे और मिलकर चर्चा करेंगे।असंतुष्ट माने जा रहे विधायक उदय लाल आंजना, दौलत राज नायक, गंगासहाय शर्मा, सी.एल. प्रेमी, रामलाल मेघवाल व गंगाबेन गरासिया दोपहर बाद बैरवा से मिलने उनके निवास पर पहुंचे थे। मंत्री से मिलने के बाद इन विधायकों ने पत्रकारों से कहा कि बैरवा से बातचीत में उन्होंने कहा है कि मंत्रियों के अधिकार मुख्यमंत्री ने अपने हाथ में ले रखे हैं, जिससे मंत्रियों की नौकरशाहों के सामने नहीं चल रही।
विधायकों ने सरकार में सुनवाई नहीं होने का आरोप भी लगाया। उन्होंने यह भी स्पष्ट करने की कोशिश की है कि वे पार्टी के भले के लिए ही आलाकमान से मिलने गए थे, न कि पार्टी को कमजोर करने के लिए। इन विधायकों ने आरोप लगाया कि काम नहीं होने के कारण अनुसूचित जाति व अनुसूचित जन जाति के लोग सरकार से नाराज हैं। ये विधायक उद्योग मंत्री राजेन्द्र पारीक से भी सचिवालय में मिले।
विधायकों ने गहलोत से मंत्रियों की शिकायत की, मनमानी का आरोप
तबादलों के मौसम में कांग्रेस के कुछ विधायकों ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से मुलाकात कर मंत्रियों पर तबादले व अन्य मामलों में मनमानी करने की शिकायत की है। इन विधायकों ने औपचारिक तौर पर तो मुख्यमंत्री से मिलने के सामान्य कारण बताए लेकिन नाम न छापने की शर्त पर कहा कि उन्होंने मंत्रियों की शिकायत की है। इन विधायकों ने यहां तक बताया कि सूचियां जारी होने के बाद मंत्री-विधायकों के बीच टकराव की नौबत आ सकती है। विधायकों ने तबादलों पर प्रतिबंध नहीं लगाने की भी मांग की। विधायकों ने कहा कि तबादले साल भर खुले रहने चाहिए। प्रतिबंध लगने पर नौकरशाह, विधायकों को पूछते तक नहीं हैं। उनका कहना था कि मंत्री अपने हिसाब से तबादला सूची तैयार कर रहे हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि कि बिना विधायक की इच्छा से किसी का तबादला नहीं किया जाए। मुख्यमंत्री से उनके आवास पर मंगलवार शाम संसदीय सचिव जाहिदा, सरकारी उप मुख्य सचेतक रतन देवासी, प्रतापसिंह खाचरियावास, प्रमोद जैन, रमेश खण्डेलवाल, आदराम मेघवाल, प्रकाश चौधरी, रामलाल मेघवाल, भगवान सहाय सैनी, ओम जोशी, महावीर मोची सहित अन्य विधायकों ने अलग-अलग मुलाकात की। पता चला है कि तबादलों पर झंझट के चलते जयपुर सांसद महेश जोशी ने तो शिक्षा मंत्री बृजकिशोर शर्मा तथा चिकित्सा मंत्री ए.ए.खान को तो डिजायर ही नहीं भेजी।
मैने मुख्यमंत्री से कहा है कि जनता के प्रति जबावदेही बनी रहे, इसलिए तबादले हमेशा खुले रहने चाहिए। इससे जनता का काम नहीं करनेवाले अधिकारी-कर्मचारियों को सबक सिखाया जा सकेगा। प्रताप सिंह खाचरियावास, कांग्रेसी विधायक
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