धूमधाम से मनाई हनुमान जयंती
देवाधिदेव महादेव के ग्यारहवें रूद व श्रीराम भक्त हनुमान का जन्मोत्सव शुक्रवार को विभिन्न मंदिरों मे धूमधाम से मनाया गया। हनुमान जी की पूजा करने से मिलने वाले अमोध फल को देखते हुए मंदिरों में सुबह से ही भक्तों की भीड़ दिखाई दी।
शहर में स्थित हनुमान के मंदिर के पुजारी ने बताया कि श्रद्धा व विश्वास से की गई उनकी पूजा के बाद किसी भी तरह के अरिष्ट का भय नहीं रहता। भगवान हनुमान अपने भक्त को सुख, समृद्धि व एश्वर्य प्रदान करते हैं। हनुमान जी को सभी ग्रहों का वरदान है कि जो भी हनुमान का भक्ति पूर्वक पूजन करेगा उसे किसी और तरह की ग्रह शांति की आवश्यकता नहीं है। ऐसी मान्यता है कि मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के जन्म के ठीक छह दिन बाद ही हनुमान जी का भी पृथ्वी पर अवतरण हुआ था।  पुजारी के मुताबिक हनुमान के बारे में भक्तों की मान्यता है कि प्रसन्न होने पर ये माता सीता द्वारा वरदान रूप में प्राप्त आठ सिद्धियों व नौ निधियों, अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व व वशित्व इन अष्ट सिद्धियों में कुछ भी दे सकते हैं। इसलिए इन्हें अष्टसिद्धि नौ निधि के दाता भी कहा जाता है। हनुमान जी की जयंती पर भक्तों ने मंदिरों में लड्डू बांटे व लंगर भी लगाए।
वीर हनुमान मंदिर में 12 घंटे जाप हुआ : 
श्री मंगल बालाजी परिवार की ओर से लगातार चौथे वर्ष सदर बाजार स्थित वीर बालाजी हनुमान मंदिर में संगीतमय हनुमान चालीसा का जाप किया गया । परिवार के प्रवक्ता तरुण सागर श्रीमाली ने बताया कि सुबह सवा पांच बजे से शाम 5:15 तक लगातार 12 घंटे तक हनुमान चालीसा का जाप किया गया  शाम को प्रसाद वितरण के साथ कार्यक्रम संपन्न हुआ । 

शाम 5 बजे निकली सवारी:
श्री बजरंग सत्संग समिति की ओर से शोभायात्रा निकाली गयी । समिति के सचिव इंद्रप्रकाश पुरोहित ने बताया कि शाम पांच बजे स्थानीय विरात्रा माता मंदिर से वीर हनुमान की सवारी रवाना हुई जो शहर के मुख्य मार्गों से होते हुए सदर बाजार स्थित वीर बालाजी हनुमान मंदिर पहुँची  । जहां 121 किलो चूरमे का भोग लगाया गया । वहीं रात 8:30 बजे माहेश्वरी भवन के सामने सुंदरकांड पाठ भी आयोजित होगा। इसी तरह केसरीनंदन बालाजी परिवार की ओर से सफेद आंकड़ा स्थित हनुमान मंदिर में शुक्रवार रात साढ़े आठ बजे सुंदरकांड पाठ का आयोजन किया जाएगा। 

0 comments:

एक टिप्पणी भेजें

 
HAFTE KI BAAT © 2013-14. All Rights Reserved.
Top