शादी का रजिस्ट्रेशन नहीं कराने पर होगी जेल! 
नई दिल्ली। केंद्रीय केबिनट ने गुरूवार को एक प्रस्ताव को मंजूरी दे दी जिससे देश में शादी का पंजीकरण अनिवार्य होगा। ऎसा नहीं करने पर जेल जाना पड़ सकता है। केबिनेट ने कानून मंत्रालय के उस प्रस्ताव को भी मंजूर कर लिया जिसके अनुसार विवाह का पंजीकरण दोनों पक्षों के धर्म का खुलाया किए बिना भी किया जा सकेगा। कानून मंत्रालय ने इससे पहले मौजूदा जन्म व मृत्यु पंजीकरण कानून में सुधार के लिए संशोधन का प्रस्ताव किया था। इसके अलावा अब सिख धर्म की शाद के लिए अलग कानून होगा। सिखों की शादी अनंत कारज एक्ट के तहत होगी। अब तक सिखों की शादी भी हिंदू विवाह अधिनियम के तहत ही होती थी।अन्य सिफारिशों में कानून मंत्रालय ने प्रस्ताव किया कि शादी के पंजीयन के लिए धर्म के उल्लेख की जरूरत वापिस ली जाए। इसके पीछे उद्देश्य अंतरजातीय विवाह प्रक्रिया को आसान बनाना है। मंत्रालय के अनुसार धर्म के आधार के बिना शादियों के रजिस्ट्रेशन से उन लोगों को फायदा होगा जो विवाह बंधन में बंधने को लेकर सामाजिक व जातीय दबाव झेल रहे हैं।जो अपनी शादी हिंदू विवाह कानून के तहत रजिस्टर कराना चाहते हैं उनके लिए कोई मनाही नहीं होगी और जो अपने धर्म के बाहर विवाह करना चाहते हैं वे विशेष विवाह कानून के तहत पंजीयन करा सकते हैं।सरकार के इस फैसले से सिख, जैन और बौद्ध धर्म के लोगों को फायदा होगा जिन्हें हिंदू कानून के तहत शादी के प्रमाणपत्र जारी किए जाते हैं।

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