ऐसा गाव जहा जिंदगी जीना बड़ा मुश्किल
कहते है इन्सान को जिन्दा रहने के लिए पानी की जरुरत पड़ती है लकिन जब वो पानी ही लोगो के लिए आफत बन जाये ऐसा ही कुछ हुआ है बाड़मेर जिले के झाखरड़ा क्षेत्र में
कहते है इन्सान को जिन्दा रहने के लिए पानी की जरुरत पड़ती है लकिन जब वो पानी ही लोगो के लिए आफत बन जाये ऐसा ही कुछ हुआ है बाड़मेर जिले के झाखरड़ा क्षेत्र में
बाड़मेर जिले में पीने का पानी लेने के लिए कोसो दूर तक जाना पड़ता है लेकिन इस गाव में इसके विपरीत है पानी लाने के लिए कोसो दूर नहीं जाना पड़ता बल्कि पानी से बचना पड़ता है राजस्थान के मुखिया अशोक गहलोत का नारा है-पानी बचाओ, बिजली बचाओ, सबको पढ़ाओ। बाड़मेर जिले के झाखरड़ा क्षेत्र के हालात मुख्यमंत्री के इस नारे की पोल खोल रहे हैं। हालत यह है कि लाखो लीटर पानी व्यर्थ बह रहा है, पानी के भराव के कारण विद्यार्थियों की पढ़ाई में बाधा आ रही है और यहां का विद्युत ग्रिड सब स्टेशन भी पानी में डूबा है। इस क्षेत्र की हालत बद से आगे निकलकर बदतर हो गई है।
झाखरड़ा क्षेत्र में पिछले तीन वर्ष से करीब पांच किलोमीटर के दायरे में पानी फैला हुआ है। पानी का भराव एक फीट से लेकर तीस फीट तक हो गया है। इस पानी में चार डामर सड़कें डूबी हुई है, जिससे इस क्षेत्र के गांवों के रास्ते बदलकर लम्बे हो गए हैं। जिन्दगी यहां इतनी मुश्किल हो गई है कि जीने वाले पिछले तीन वष्ाü से तौबा-तौबा कर रहे हैं,लेकिन उनकी सुनने वाला दूर-दूर तक कोई नहीं है। प्रशासन व सरकार ने तो जैसे इस क्षेत्र से मुंह ही मोड़ लिया है। पानी से पीडित ग्रामीण विरधाराम व उनके साथ खड़े लोग बताते हैं कि हमने कलक्टर से लेकर मंत्रीजी राजस्व मंत्री व स्थानीय विधायक हेमाराम चौधरी तक सबको बताया, लेकिन वे भी कहते हैं कि इसका तो क्या करें। अब तो ग्रामीणों ने पानी से होने वाली बर्बादी को अपनी नियति मानकर किसी को कुछ कहना ही छोड़ दिया है।
किसानों की जमीन बर्बाद :- करीब पांच सौ मीटर दूर पानी में डूबी हुई एक झोपड़ी की ओर इशारा करते हुए किसान मोहनलाल मुंशीराम नैण बताते हैं कि वहां पर उनकी एक सौ बीघा खातेदारी जमीन है। झोपड़ी तो कब की छूट गई, लेकिन जमीन भी पानी में गई। कमोबेश बर्बादी की यह कहानी कई किसानों के माथे पर साफ नजर आती है। किसानों की सैकड़ों बीघा जमीन को पानी व इससे उपजे खार ने बंजर बना दिया है।
पता लगवाते हंै कि क्या स्थिति है
अरूण पुरोहित, अतिरिक्त जिला कलक्टर, बाड़मेर का कहना है की झांकरड़ा के हालात के बारे में मुझे कोई जानकारी नहीं है। पता लगवाते हैं कि क्या स्थिति है। इस बाद ही कुछ कहना संभव होगा।
वन्य प्राणी गायब पौधे पानी में :- झाखरड़ा क्षेत्र में वन विभाग की करीब ढाई हजार बीघा जमीन है। अधिकांश जमीन पानी में डूब गई है। यहां रहने वाले वन्य प्राणी यथा हरिण, काला हरिण, खरगोश, लोमड़ी, तीतर इत्यादि वन्य जीव गायब हो गए हैं। ग्रामीण बताते हैं कि हजारों जीव डूबकर मर गए। वन विभाग ने यहां पर 1500 से अधिक पौधे लगाए, वह भी पानी में डूब गए।
नर्मदा से आता है पानी:- राजस्थान गुजरात सीमा पर नर्मदा नहर पर एस्केप नहीं है। एस्केप नहीं होने के कारण नहर में पानी अधिक होने पर इसे झाखरड़ा क्षेत्र में खुले में छोड़ा जा रहा है। यह स्थिति पिछले तीन वर्ष से यथावत है। इसलिए पांच किलोमीटर की परिधि में समंदर बना हुआ है, जो बढ़ता ही जा रहा है।
किसानों की जमीन बर्बाद :- करीब पांच सौ मीटर दूर पानी में डूबी हुई एक झोपड़ी की ओर इशारा करते हुए किसान मोहनलाल मुंशीराम नैण बताते हैं कि वहां पर उनकी एक सौ बीघा खातेदारी जमीन है। झोपड़ी तो कब की छूट गई, लेकिन जमीन भी पानी में गई। कमोबेश बर्बादी की यह कहानी कई किसानों के माथे पर साफ नजर आती है। किसानों की सैकड़ों बीघा जमीन को पानी व इससे उपजे खार ने बंजर बना दिया है।
पता लगवाते हंै कि क्या स्थिति है
अरूण पुरोहित, अतिरिक्त जिला कलक्टर, बाड़मेर का कहना है की झांकरड़ा के हालात के बारे में मुझे कोई जानकारी नहीं है। पता लगवाते हैं कि क्या स्थिति है। इस बाद ही कुछ कहना संभव होगा।
वन्य प्राणी गायब पौधे पानी में :- झाखरड़ा क्षेत्र में वन विभाग की करीब ढाई हजार बीघा जमीन है। अधिकांश जमीन पानी में डूब गई है। यहां रहने वाले वन्य प्राणी यथा हरिण, काला हरिण, खरगोश, लोमड़ी, तीतर इत्यादि वन्य जीव गायब हो गए हैं। ग्रामीण बताते हैं कि हजारों जीव डूबकर मर गए। वन विभाग ने यहां पर 1500 से अधिक पौधे लगाए, वह भी पानी में डूब गए।
नर्मदा से आता है पानी:- राजस्थान गुजरात सीमा पर नर्मदा नहर पर एस्केप नहीं है। एस्केप नहीं होने के कारण नहर में पानी अधिक होने पर इसे झाखरड़ा क्षेत्र में खुले में छोड़ा जा रहा है। यह स्थिति पिछले तीन वर्ष से यथावत है। इसलिए पांच किलोमीटर की परिधि में समंदर बना हुआ है, जो बढ़ता ही जा रहा है।

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