शिरडी: साईं दरबार में 15 दिन में दो भक्‍तों की मौत
नासिक. शिरडी में साईं बाबा के दरबार में हर साल करोड़ों का चढ़ावा चढ़ता है लेकिन दर्शन के लिए यहां आने वाले भक्‍तों को मिलने वाली सुविधाओं की हालत चिंताजनक है। दर्शन के लिए कतार में लगे दो भक्‍तों की मौत के बाद मंदिर प्रशासन को कठघरे में खड़ा किया जा रहा है। बुधवार को मंदिर परिसर में मुंबई से आए दिलीप चौरसिया (35) की मौत से यहां की सुविधाओं पर सवाल उठने लगे हैं। दिलीप यहां मंदिर में होने वाली शेज आरती के बाद काकड़ आरती के लिए लाइन में लगे थे। यह आरती भोर में साढ़े चार बजे होती है। लेकिन इसके लिए एक दिन पहले शाम से ही लाइन में लगना पड़ता है। कई भक्‍त लाइन में लगे लगे सो भी जाते हैं। चौरसिया ने भी ऐसा ही किया। जब मंदिर के कर्मचारी काकड़ आरती के लिए दरवाजा खोलने पहुंचे तो चौरसिया वहां जमीन पर ही पड़े मिले। उन्‍हें तत्‍काल अस्‍पताल ले जाया गया लेकिन डॉक्‍टरों ने मृत घोषित कर दिया। हालांकि अभी तक पता नहीं चल सका है कि चौरसिया की मौत कैसे हुई।15 दिनों के भीतर ही भक्‍त के मौत की यह दूसरी घटना है। बीते 10 मार्च को ही बेलगांव से अपने परिवार के साथ आया सेना का एक जवान लाइन में खड़े खड़े ही गिर पड़ा और उसकी मौत हो गई। स्‍थानीय लोगों का कहना है कि यहां वेंटिलेशन सिस्‍टम तो है लेकिन सुविधाएं और बढ़ाए जाने की जरूरत है। ऐसी भी खबरें आती रही हैं कि मंदिर परिसर में लगे ‘एक्‍जॉस्‍ट फैन’ भी बंद हो जाते हैं। ऐसे मौकों पर महिला भक्‍तों की साड़ी फैन के ब्‍लेड में फंस जाने को वजह बताया जाता है। मौजूदा सिस्‍टम को सेंट्रलाइज्‍ड एयर कंडीशनिंग से बदले जाने की योजना है लेकिन इसके लिए नए ट्रस्‍टी के काम संभालने का इंतजार किया जा रहा है। बॉम्‍बे हाई कोर्ट की औरंगाबाद बेंच ने बीते हफ्ते साईं बाबा संस्‍थान ट्रस्‍ट, शिरडी के ट्रस्‍ट बोर्ड को भंग कर दिया था। ट्रस्‍ट बोर्ड का कार्यकाल जरूरत से ज्‍यादा बार बढ़ाया जाने को लेकर याचिका पर अदालत ने यह कदम उठाया है।
शिरडी साईं के दर्शन के लिए हर दिन हजारों भक्‍त आते हैं। कई लोगों के लिए शाम को होने वाली शेज आरती और सुबह की काकड़ आरती में हिस्‍सा लेना जरूरी होता है। स्‍थानीय निवासी सचिन तांबे का कहना है, ‘भक्‍तों को काफी दूर तक कतार में लगना पड़ता है। मंदिर परिसर में वेंटिलेशन के लिए खिड़कियां, एक्‍जॉस्‍ट फैन और तापमान नियंत्रित करने के लिए वाटर फॉग चालू किए जाते हैं। लेकिन भीड़ बढ़ने पर इनसे भी हालात काबू में नहीं हो पाते। यहां आने वाले विकलांग भक्‍तों के लिए रैम्‍प लगाए जाने और वीआईपी दर्शन की तादाद कम करने की जरूरत है।
शिरडी में दिन-प्रतिदन भक्‍तों की तादाद बढ़ती ही जा रही है। त्‍यौहारों, वीकेंड, साल के अंत में छुट्टियों के दौरान लाखों भक्‍त मंदिर में दर्शन के लिए आते हैं। भक्‍तों की बढ़ती भीड़ के मद्देनजर सितंबर 2011 में महाराष्‍ट्र सरकार ने राज्‍य के ऐसे सभी धार्मिक स्‍थलों के लिए एक शासनादेश जारी किया था। इसमें कहा गया है कि कुछ खास दिनों में वीआईपी के एंट्री पर बैन लगाई लाए। मंदिर ट्रस्‍ट को वीकेंड पर पास जारी करने की इजाजत मिली थी। ऐसी रिपोर्ट थी कि ट्रस्‍ट बोर्ड हर दिन के लिए सीमित संख्‍या में पास जारी करेगा लेकिन इसका पालन नहीं किया जा रहा है। शिरडी के ही निवासी पी गोंडकर का आरोप है, ‘उस वक्‍त के ट्रस्‍टी अपने हित साधने के चक्‍कर में थे। उन्‍होंने अपने फायदे के लिए बड़े लोगों से संपर्क बनाए।’

0 comments:

एक टिप्पणी भेजें

 
HAFTE KI BAAT © 2013-14. All Rights Reserved.
Top