गे सेक्स पर सरकार ने लिया यू-टर्न, सुप्रीम कोर्ट नाराज
नई दिल्ली।। पहले के अपने रुख से उलट केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में समलैंगिक यौन संबंधों को अपराध के दायरे से बाहर लाने का पक्ष लिया। केंद्र के इस यू-टर्न पर नाराजगी जताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की कि सरकार को व्यवस्था का मजाक नहीं बनाना चाहिए। इस मामले में मंगलवार को सुनवाई शुरू होने पर अडिशनल सॉलिसिटर जनरल मोहन जैन ने बेंच से कहा कि सरकारी फैसले के मुताबिक 2009 में समलैंगिक यौन संबंध को अपराध के दायरे से बाहर करने वाले दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश में कोई कानूनी त्रुटि नहीं है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से कोर्ट में पेश हुए जैन का रुख केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से इस मामले में हाजिर हुए अडिशनल सॉलीसिटर जनरल पी. पी. मल्होत्रा की दलील से उलट है, जिन्होंने इसका विरोध किया था। कोर्ट में मंगलवार को स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से पेश हुए अडिशनल सॉलिसिटर जनरल मोहन जैन ने कहा, 'दिल्ली हाई कोर्ट के निर्णय में कोई कानूनी खामी मालूम नहीं पड़ती। कोर्ट का निर्णय कानूनी रूप से सही है या नहीं, इस बारे में सुप्रीम कोर्ट निर्णय ले सकता है।' सरकार के बदलते रुख पर कड़ी टिप्पणी करते हुए जस्टिस जी. एस. सिंघवी और जस्टिस एस. जे. मुखोपाध्याय की बेंच ने केंद्र की खिंचाई करते हुए कहा कि वह व्यवस्था का मजाक नहीं बनाए और और अदालत का समय बर्बाद नहीं करे। बेंच ने कहा कि वह सरकार के नए निवेदन को स्वीकार नहीं कर सकती जिसमें कहा गया है कि समलैंगिकता से सम्बंधित आईपीसी की धारा 377 को समाप्त करने के दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश में कुछ भी गलत नहीं है। जस्टिस सिंघवी ने यह कहते हुए सरकार का नया निवेदन स्वीकार करने से इनकार कर दिया, 'हम किसी को भी अपना समय बर्बाद करने की अनुमति नहीं दे सकते।' गौरतलब है कि हाई न्यायालय ने 2 जुलाई, 2009 के एक महत्वपूर्ण फैसले में समलैंगिकता को अपराध बताने वाली आईपीसी की धारा 377 को निरस्त कर दिया था। पिछले हफ्ते केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से कोर्ट में पेश हुए मल्होत्रा ने समलैंगिकता को अनैतिक बताते हुए कहा था कि इससे एचआईवी फैल रहा है। मल्होत्रा ने दलील दी थी, हमारा संविधान अलग है और हमारी नैतिकता व हमारे मूल्य भी दूसरे देशों से अलग हैं, इसलिए हम उनका (दूसरे देशों के मूल्यों) पालन नहीं कर सकते।' मल्होत्रा ने जस्टिस सिंघवी और जस्टिस मुखोपाध्याय की बेंच के सामने तर्क दिया, 'समलैंगिक संबंध बहुत अनैतिक व सामाजिक व्यवस्था के खिलाफ हैं और इस तरह के कृत्यों से बीमारियां फैलने के ज्यादा आसार होते हैं। लेकिन कुछ ही घंटों बाद मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा था कि सरकार समलैंगिकता पर प्रतिबंध लगाने की स्थिति में नहीं है।

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