एनओसी देने में घपला!
जयपुर। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की ओर से प्रदेश में नए खुलने वाले नर्सिग कॉलेजों को एनओसी देने वाली कमेटी एक बार फिर सवालों के घेरे में है। किसी संस्थान के पास भवन था लेकिन अस्पताल नहीं और किसी के पास अस्पताल था, तो संस्थान चलाने के लिए भवन नहीं होने पर भी ऎसे संस्थानों को एनओसी देने की तैयारी की जा रही है। इस एनओसी प्रकरण में चौकाने वाली बात यह है कि नर्सिग काउंसिल के पास 300 निरीक्षक होने के बावजूद भी 125 कॉलेजों का निरीक्षण महज सात निरीक्षकों से चंद दिनों में करा डाला गया। इसके चलते पूरी एनओसी कमेटी ही सवालों के घेरे से घिर गई है। सिर्फ सात निरीक्षकों से ही
निरीक्षण क्यों :- चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के अघिकृत सूत्रों के अनुसार विभाग को दूसरे चरण में 125 नर्सिग संस्थानों को एनओसी देनी थी लेकिन विभाग ने आनन-फानन में नर्सिग काउंसिल के सात निरीक्षकों को निरीक्षण में लगाया और रातों रात इन संस्थानों को एनओसी देने की अनुशंसा कर दी। जबकि विभाग के अघिकारियों का कहना है कि काउंसिल के पास ही 300 निरीक्षक हैं तो सिर्फ सात निरीक्षकों से ही क्यों निरीक्षण कराया गया। इस मामले में नर्सिग काउंसिल के रजिस्ट्रार ने भी चुप्पी साध रखी है।
जयपुर। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की ओर से प्रदेश में नए खुलने वाले नर्सिग कॉलेजों को एनओसी देने वाली कमेटी एक बार फिर सवालों के घेरे में है। किसी संस्थान के पास भवन था लेकिन अस्पताल नहीं और किसी के पास अस्पताल था, तो संस्थान चलाने के लिए भवन नहीं होने पर भी ऎसे संस्थानों को एनओसी देने की तैयारी की जा रही है। इस एनओसी प्रकरण में चौकाने वाली बात यह है कि नर्सिग काउंसिल के पास 300 निरीक्षक होने के बावजूद भी 125 कॉलेजों का निरीक्षण महज सात निरीक्षकों से चंद दिनों में करा डाला गया। इसके चलते पूरी एनओसी कमेटी ही सवालों के घेरे से घिर गई है। सिर्फ सात निरीक्षकों से ही
निरीक्षण क्यों :- चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के अघिकृत सूत्रों के अनुसार विभाग को दूसरे चरण में 125 नर्सिग संस्थानों को एनओसी देनी थी लेकिन विभाग ने आनन-फानन में नर्सिग काउंसिल के सात निरीक्षकों को निरीक्षण में लगाया और रातों रात इन संस्थानों को एनओसी देने की अनुशंसा कर दी। जबकि विभाग के अघिकारियों का कहना है कि काउंसिल के पास ही 300 निरीक्षक हैं तो सिर्फ सात निरीक्षकों से ही क्यों निरीक्षण कराया गया। इस मामले में नर्सिग काउंसिल के रजिस्ट्रार ने भी चुप्पी साध रखी है।

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