राहुल व वरुण गाँधी में तुलना

नई दिल्ली विधानसभा चुनाव के करीब आते ही एक नई किताब में कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी और उनके चचेरे भाई वरुण गांधी की तुलना की गई है। इसमें कहा गया है कि वरुण भाजपा में अलग-थलग पड़े हुए हैं, जबकि कांग्रेस राहुल के पीछे खड़ी है। बहुत हद तक यह उनके माता या पिता की पसंद का ही नतीजा है। राहुल के पिता राजीव गांधी के प्रति लोगों की सोच अच्छी थी। वहीं वरुण के पिता संजय गांधी को लोग उनकी नीतियों के कारण नापसंद करते थे। राहुल नाम की यह किताब पत्रकार जतिन गांधी और वीनू संधू ने लिखी है। किताब में कहा गया है, राहुल धर्मनिरपेक्ष दिखने के लिए अतिरिक्त प्रयास करते हैं, जबकि वरुण इसके विपरीत कार्य करते हैं। कांग्रेस राहुल को भावी प्रधानमंत्री के रूप में देखती है, वहीं वरुण भाजपा में अभी भी विश्वसनीय नहीं है क्योंकि वह आखिरकार हैं तो गांधी ही। किताब के मुताबिक भाजपा नेताओं ने वरुण को कई बार पार्टी लाइन से विचलित होने से रोका है, जबकि राहुल के मामले में कोई बदलाव कांग्रेस के लिए नई लाइन हो जाती है। वर्ष 2010 के बिहार विधानसभा के चुनाव परिणाम यह दिखाते हैं कि कांग्रेस द्वारा गठबंधन से किनारा करने की राहुल की नीति के परिणामस्वरूप पार्टी को नुकसान हुआ है। यही नहीं संसद में मई, 2009 से लेकर 2011 के मानसून सत्र तक उन्होंने एक भी सवाल नहीं पूछा। जबकि अन्य पार्टी के सांसदों ने 15वीं लोकसभा में दो साल में औसतन 119 सवाल पूछे।

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