थर्ड पार्टी की आॅडिट रिपोर्ट व काजरी की रिपोर्ट का मुल्याकंन की मांग- अपूर्व भंडारी
बाड़मेर 
केयर्न इंडिया के पर्यावरण के प्रति ढोंग व ग्रामीणों के उत्पीड़न के खिलाफ धरना पांचवें दिन भी जारी रहा। धरने पर बैठे ग्रामीणांे ने शुक्रवार की रोज अपने कार्य पर केयर्न के अधिकारीयों द्वारा दिये जा रहे गैर जिम्मेदाराना बयानों पर भी नाराजगी जाहिर की गई साथ ही केयर्न द्वारा संस्था के कार्यो को आॅडिट पार्टी के निरीक्षण पर खरा नहीं उतरने की बात कही गई है जो कि तथ्यों से परे है ग्रामीणों ने संस्थान के कार्यो को थर्ड पार्टी की आॅडिट रिपोर्ट व काजरी की रिपोर्ट का मुल्याकन करने की मांग की। ज्ञात रहे कि पूर्व में नियुक्त संस्था के कार्यमुक्त होने के 24 दिन बाद भी पिडि़त ग्रामवासीयों व लगाये गए हरे भरे पौधे व्याकुल व भुखे प्यासे नजर आये। ग्रामीणांे ने बाड़मेर स्थित केयर्न आॅफिस के पास धरना प्रदर्षन किया। इस पुरे प्रकरण पर केयर्न के उदासीन रवैये पर अपूर्व भंडारी ने कहा कि केयर्न द्वारा तीसरी पार्टी द्वारा आॅडिट करवाने पर कयर्न द्वारा पुरी रिपोर्ट को परिवर्तित कर दिया गया। मौेके पर आज भी पौधे अच्छे और पुरी संख्या में है जो कि केन्द्रिय शुष्क अनुसंधान क्षैत्र (काजरी) टीम द्वारा हमने हमारे स्तर पर आॅडिट करवाया उसकी रिपोर्ट हमारे पास है । इससे यह साफ होता है कि मौके पर पौधे अच्छे है केयर्न द्वारा जानबुझकर सत्य छिपाया गया है और गलत रिपोर्ट तैयार करके ग्रामीणों के पैसे नहीं देना और पौधों के प्रति नकारात्मक रवैये से 24 दिन बाद भी ग्रामीणा व संस्था द्वारा पौधों की देखभाल की जा रही है। यदि पौधों के प्रति इनको इतना ही प्यार है तो आज तक 24 दिन बाद भी इसकी देखभाल करने कोई क्यों नहीं आया। 18 माह के पौधों की अगर संस्था व ग्रामीणा देखभाल नहीं करते तो अब तक सारे पौधे खत्म हो जाते। ग्रामीण कर्मचारियों का वेतन व अन्य भुगतान कई महिनों से लम्बित है। अगर केयर्न की रिपोर्ट सही है तो काजरी व केयर्न द्वारा की गई आॅडिट रिपोर्ट का मिलान किया जावें। भीषण गर्मी के बावजूद ग्रामीण सड़कों पर असहाय अवस्था में धरना व गांवों मंे पेड़ों की देखरेख का कार्य कर रहे है। संसाधनों की कमी के चलते हुए संस्था की मदद से किसी तरह 25 हजार से भी अधिक पेड़ों को बचाने के लिये मटको व बाल्टीयों से पानी डालने को विवष है। चैखला ग्रामवासी रेवन्तसिंह ने कहा कि चैखला स्कुल के अंदर और ग्राम पंचायत की जमीन पर अच्छे पौधे तैयार किये गये है परन्तु केयर्न द्वारा फूट डालो और राज करो की नीति के तहत इस पुरे प्रकरण पर केयर्न की लीपापोती बर्दाष्त नहीं की जायेगी क्योंकि उन्होनें पहले तो पंचायत भूमि पर पेड़ लगाये, फिर सुचारू रूप से कार्य कर रही संस्था व गा्रमवासियों को अचानक कार्यमुक्त करने के बाद पौधों व ग्रामीणों की दुर्दषा कर एक छलावा किया है। 
उल्लेखनीय है इन पौधों के देखरेख एवं संरक्षण की जिम्मेदारी पर्यावरण अनुपालन की प्रक्रिया के तहत केयर्न इण्डिया की थी। लेकिन पिछले कई दिनों से उन्होनें इन सारे पौधों को भगवान के भरोसे छोड़ दिया है। केयर्न इण्डिया द्वारा पूर्व में भी कई बार संस्था का भुगतान रोके जाने से ग्रामीणों को मानसिक प्रताड़ना झैलनी पड़ी व पौधे के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ा। परन्तु इन सबके बावजूद भी संस्था व ग्रामवासियों ने पौधों के सरक्षण का कार्य सुचारू रूप से जारी रखा। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि इस विषय में तुरंत कोई कार्यवाही नहीं की गई तो इस धरने को उग्र जन आदोलन का रूप दिया जायेगा व पेड़ो व धरने पर बैठें ग्रामीणों को भीष्ण गर्मी में कोई स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ता है तो उसकी जिम्मेदारी भी केयर्न इण्डिया की होगी। 

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