बजरी खनन पर अब 82 का अधिकार
जयपुर।
सुप्रीम कोर्ट ने प्रदेश में बजरी खनन पर लगी रोक जरूर हटा दी है, लेकिन खनन का अधिकार 82 लीजधारकों के पास होने से इस कारोबार पर सिर्फ इनका ही एकाधिकार हो गया है। उल्लेखनीय है कि पहले कोई भी खान विभाग की अनुमति से बजरी खनन कर सकता था। इस एकाधिकार से बजरी महंगी होने की भी आशंका पैदा हो गई है। दरअसल राज्य सरकार ने इन लीजधारकों को बजरी खनन के पट्टे तो दे दिए, लेकिन बजरी के भाव पर नियंत्रण के लिए सिस्टम नहीं बनाया गया।
16 के लीज निरस्त होंगे
भवन निर्माताओं को राहत
बजरी खनन पर लम्बे समय से रोक के कारण इसके दाम 50 से 60 रूपए फीट तक पहुंच गए थे। इससे प्रदेश में भवन निर्माण लगभग बंद हो गए थे। सरकारी काम भी अटके थे। अब बजरी बाजार में आने से निर्माण कार्य चालू होंगे और मजदूरों को भी रोजगार मिल जाएगा। बजरी खनन से राज्य में 18-20 हजार ट्रक चालकों, करीब एक लाख से अधिक मजदूरों को फिर से रोजगार मिलेगा।
नोटिस जारी किए
सुप्रीम कोर्ट ने बजरी पर लगी रोक हटा दी है। अब राज्य में 82 एलओआई धारक बजरी खनन कर सकेंगे। जिन एलओआई धारकों ने पर्यावरण एनओसी के लिए आवेदन नहीं किया है, उनकी लीज निरस्त करने के लिए नोटिस जारी किए गए हैं। बी.एस. सोढा, अतिरिक्त निदेशक, खान एवं भू विज्ञान विभाग
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