बात-बात पर आंदोलन से अव्यवस्था
नई दिल्ली।
राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने मंगलवार को आगाह किया कि यदि लोकतांत्रिक संस्थाओं पर प्रहार हुआ तो देश में अव्यवस्था फैल जाएगी। अन्ना हजारे और रामदेव के प्रदर्शनों का सीधा उल्लेख किए बिना राष्ट्रपति ने संसद जैसी संस्थाओं को कमतर आंकने के खतरों को रेखांकित किया।
जब अघिकारी सत्तावादी बन जाए तो लोकतंत्र पर असर होता है, लेकिन जब बात बात पर आंदोलन होने लगें तो अव्यवस्था फैलती है। राष्ट्रपति ने कहा कि लोकतंत्र साझा प्रक्रिया है। हम साथ-साथ ही जीतते या हारते हैं। संसद अपने कैलेंडर और लय से चलेगी। कभी कभार यह लय बिना तान की लग सकती है, लेकिन लोकतंत्र में हमेशा फैसले का दिन आता है और वह होता है चुनाव। संसद जनता और भारत की आत्मा है। हम इसके अघिकारों और कर्तव्यों को अपने जोखिम पर चुनौती देते हैं।
सीमाओं पर सतर्कता की जरूरत
मुखर्जी ने कहा कि सीमाओं पर सतर्कता की आवश्यकता है और वह अंदरूनी सतर्कता से मेल खाती होनी चाहिए। हमें अपने राजतंत्र, न्यायपालिका, कार्यपालिका और विधायिका के उन क्षेत्रों में विश्वसनीयता बरकरार रखनी चाहिए जहां शायद संतोष, थकान या जनसेवक के गलत आचरण के कारण काम रूका हुआ हो। अर्थव्यवस्था का उल्लेख करते हुए विकास दर 1947 में एक प्रतिशत की वार्षिक औसत दर से पिछले सात सालों में आठ प्रतिशत तक जा पहुंची है। हमें आजादी का दूसरा स्वतंत्रता संग्राम लड़ना होगा कि भारत भूख, बीमारी और गरीबी से हमेशा के लिए मुक्त हो जाए।
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