बाड़मेर नगर परिषद कर्मचारियों ने दिया धरना, राजनीतिक द्वेष भावना से हो रही एफआईआर 

बाड़मेर.
राजस्थान के बाड़मेर नगर परिषद में लगे कार्मिको के खिलाफ हो रही लगातार एफआईआर के खिलाफ नगर परिषद् कार्मिको ने परिषद के आगे ही धरने पर बैठ गए।  नगरपरिषद बाड़मेर में वर्ष 1999 से 2004 के बीच कार्यरत रहे पंद्रह अधिकारियों व कर्मचारियों के विरुद्ध मंगलवार शाम शहर कोतवाली थाने में प्राथमिकी दर्ज होने के बाद बुधवार दोपहर बाद नगरपरिषद मंत्रालयिक कर्मचारियों ने कामकाज ठप कर दिया और परिषद में अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गए।
नगरपरिषद कार्मिकों ने शाम करीब पांच बजे मुख्यमंत्री व स्वायत्त शासन मंत्री के नाम जिला कलक्टर को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में कर्मचारियों ने बताया कि वर्ष 1999 से 2004 के बीच राज्य सरकार के निर्देशानुसार शिविर आयोजित कर पट्टे जारी हुए। नगरपरिषद अधिकारियों व कर्मचारियों ने सरकारी मंशा के अनुसार अधिकाधिक लोगों को लाभान्वित करने का प्रयास किया। जो भी त्रुटियां रही, इसे लेकर वर्ष 2003 में पुलिस थाने व एसीबी में मामले दर्ज हुए। 
उनमें अधिकारियों व कर्मचारियों को दोषी नहीं माना। फिर हाईकोर्ट ने यह व्यवस्था दी कि यदि 200 वर्गगज से अधिक जो पट्टे जारी हुए हैं, उनसे डीएलसी दर से वसूली की जाए। एेसे में किसी भी स्तर पर अधिकारियों व कर्मचारियों को दोषी नहीं ठहराया। उन्होंने ज्ञापन में आरोप लगाया कि राजनीतिक द्वैष भावना के चलते पुन: जांच करवाकर थाने में अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई है। 
जिसमें उन्हें लगता है कि राजनीतिज्ञों को कोई नुकसान नहीं होने वाला, लेकिन अधिकारियों व कर्मचारियों का नुकसान होगा। कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री व स्वायत्तशासन मंत्री से अनुरोध किया कि एफआईआर को स्थगित करवाया जाए और पूर्व में अन्य मामलों में निलम्बित हुए कार्मिकों को बहाल किया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि मांगें पूर्ण नहीं होने की स्थिति में कर्मचारियों का अनिश्चितकालीन धरना जारी रहेगा।

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